

बेंगलुरु/सुल्तानपुर। कभी प्रेम का वादा, कभी मुनाफे का सपना और कभी रसूख का डर। इन्हीं तीन हथियारों से कथित तौर पर एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया गया, जिसने भरोसे को ही सबसे बड़ा शिकार बना लिया। बागलगुंटे थाना पुलिस द्वारा 31 वर्षीय शुभम शुक्ला की गिरफ्तारी ने इसी ‘विश्वास-लूट’ की परतें उधेड़नी शुरू की हैं। पुलिस के मुताबिक शुभम पर आरोप है कि उसने प्रेम संबंध और लिव-इन का झांसा देकर एक महिला से करीब 20 लाख रुपये नकद और लगभग 200 ग्राम सोना हड़प लिया। यही नहीं, उसी परिवार की एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोप में उसके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज है जो इस मामले को केवल ठगी नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में खड़ा करता है।
जांच आगे बढ़ी तो कहानी सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं रही। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी शुभम की सुल्तानपुर की ससुराल भी इस कथित खेल का अहम ठिकाना बताई जा रही है। आरोप है कि साले रमन के साथ मिलकर व्यापार में मोटा मुनाफा दिलाने के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपये जुटाए गए। जब रकम लौटाने का वक्त आया तो ब्याज पर पैसा उठाकर एक खाते से दूसरे खाते में घुमाने का खेल शुरू हुआ। यहां तक कि ससुराल की क्रेटा कार तक गिरवी रख दी गई। सूत्र बताते हैं कि पैसे मांगने पहुंचे लोगों को सिर्फ तारीखें और बहाने मिले। इसी क्रम में मोहल्ले की एक सीधी-सादी, कैंसर पीड़ित महिला से “अम्मा” कहकर साढ़े छह लाख रुपये ले लिए गए—कुछ नकद, कुछ खाते में—जो आज तक वापस नहीं हुए। बीमारी और जरूरत के बीच फंसी यह महिला आज भी इंसाफ की आस में बताई जा रही है।
जांच में सिंडिकेट की बू भी तेज होती जा रही है। सूत्रों के अनुसार शुभम और उसकी बहन श्वेता इस नेटवर्क के अहम चेहरे हैं। आरोप है कि बेंगलुरु से हड़पा गया सोना बैंक में रखकर लोन लिया गया, और उसमें से करीब 10 लाख रुपये रिश्तेदार गिरधारी तिवारी को दिए गए। जिन्हें सूद पर चलाने की बात कही जा रही है।
कहा जा रहा है कि राजनीतिक पहुँच की ढाल ने इस कथित खेल को लंबे समय तक बेखौफ बनाए रखा। सूत्र यह भी आरोप लगाते हैं कि श्वेता ने अपने पति रोहित तिवारी को झांसा देकर साढ़े छह लाख रुपये लिए और बाद में दबाव बनाने के लिए कई मुकदमे भी दर्ज करवा दिए। आरोप है कि आए दिन पति को मां, चाचा और भाई के जरिए धमकियां दिलाई जाती रहीं, जबकि रोहित के गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की बात भी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक श्वेता अपने भाई के हर कथित गलत काम की राज़दार रही है।
अब सवाल सीधा है जब प्रेम सौदा बन जाए, व्यापार जाल और पहुँच ढाल—तो कानून की पकड़ कितनी दूर तक जाएगी? अगर जांच वाकई सबूतों के आधार पर चली तो यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी पर नहीं रुकेगा, बल्कि भरोसे की आड़ में चल रहे इस कथित नेटवर्क के और भी चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
रिपोर्ट – नीरज तिवारी ( चीफ एडिटर )
