
नीरज तिवारी
सुल्तानपुर। भारत सरकार के राजपत्र संख्या 182 के विपरीत पीएचडी किए बिना ही कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, सुल्तानपुर के व्याख्याताओं की हो रही कैश के अंतर्गत पदोन्नति। बताते चले केएनआईटी में कार्यरत तीन व्याख्याता की पदोन्नति का प्रस्ताव बिना पीएचडी किए ही प्रशासनिक परिषद (बीओजी) की 56 वीं बैठक में रखा गया था जिस पर आपत्ति के बाद गठित कमेटी गठित ने पदोन्नति के प्रस्ताव पर असहमति जताई। 57वीं प्रशासनिक परिषद (बीओजी) की बैठक में पीएचडी किए बिना तीनों व्याख्याताओं की पदोन्नति के प्रस्ताव को पुनः निरस्त कर दिया। सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक परिषद (बीओजी) 60 वीं बैठक में निदेशक, केएनआईटी ने तथ्यगोपन करते हुए उपरोक्त प्रस्ताव को स्वीकृत करा लिया।
केएनआईटी के निदेशक डॉ राजीव कुमार उपाध्याय द्वारा 2018 के शासनादेश के विपरीत आर के सिंह, वाई के सिंह, प्रो समीर श्रीवास्तव आदि को वेतन वृद्धि देने की संस्तुति की गई है। जबकि ऐसे ही प्रकरण में निदेशक डॉ राजीव कुमार उपाध्याय और कुलसचिव डॉ ए के चौहान के द्वारा जारी पत्र से डॉ अवधेश द्वारा कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से 07 वर्ष के भीतर पीएचडी पूर्ण नहीं कर पाने पर उनकी वेतन वृद्धि रोक दी है। जिसके बारे पूछने पर केएनआईटी के निदेशक डॉ राजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि मैं इन प्रकरणों पर कुछ नहीं कहूंगा। वेतन भुगतान होने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा। अधिक जानकारी के लिए कुलसचिव डॉ ए के चौहान से बात कर सकते हैं।
कुलसचिव डॉ ए के चौहान ने बताया कि मुझे इन प्रकरणों से संबंधी नियम का ज्यादा ज्ञान नहीं है। क्योंकि प्रशासनिक परिषद (बीओजी) में जो प्रस्ताव रखा जाता है। उसके सचिव केएनआईटी के निदेशक होते है। जो मेरे ऊपर के स्तर के हैं। क्या सही है क्या गलत इस बात को निदेशक ही बता सकते हैं। उपरोक्त प्रकरणों की पत्रावली पर लेखाधिकारी और हमारे द्वारा कार्यवाही की जा रही है। उपरोक्त विषय पर और जानकारी लेने के लिए मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ मणि त्रिपाठी से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करने से मना करते हुए कहा गया कि इस प्रकरण पर मुझे बोलने की अनुमति नहीं है। आप डायरेक्टर से बात कर सकते हैं। दोनों प्रकरणों पर उत्तर नहीं दे पाए केएनआईटी के निदेशक, कुलसचिव और मीडिया प्रभारी। इसके डीडीओ एडीएम वित्त होते हैं जिनके हस्तक्षेप से निदेशक द्वारा किए तथ्य गोपन का खुल सकता है राज। इन प्रकरणों की शिकायत जनसुनवाई के माध्यम से मुख्यमंत्री से हुई है।

