धर्मेंद्र सिंह
बल्दीराय/सुल्तानपुर।
राजनीति में ‘अवसरवाद’ का ताज़ा उदाहरण एक बार फिर बल्दीराय ब्लॉक प्रमुख शिवकुमार सिंह बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ही , भाजपा को झटका देते हुए उन्होंने सुभासपा का दामन थामा। रविवार को वलीपुर हेमनापुर खेल मैदान में आयोजित जनसभा में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने उन्हें पीला गमछा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया। तथा प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर शिवकुमार सिंह ने 75किलो का केक काटा ।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह जनता की सेवा का संकल्प है या फिर सिर्फ़ कुर्सी बचाने और सत्ता के स्वाद को बनाए रखने की रणनीति ? जो आम चर्चा का विषय बना है।
शिवकुमार सिंह का संघर्ष , टैक्सी ड्राइवर से ‘सत्ता ड्राइवर’
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि शिवकुमार सिंह का संघर्ष से नाता रहा है आज वे एक टैक्सी ड्राइवर से सत्ता ड्राइवर हैं । इन्होंने हमेशा वही रास्ता चुना है, जहां सत्ता और लाभ मिला। कांग्रेस से शुरुआत, बसपा का सहारा, फिर सपा में पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाना। हालात बदले तो भाजपा में शामिल होकर पत्नी और खुद दोनों ने मलाईदार कुर्सियाँ ले लीं। और अब जब भाजपा में उनकी सियासी ज़मीन खिसकती दिखी तो सीधे भाजपा के ही घटक दल सुभासपा में जा पहुँचे।
सत्ता का नशा या गिरगिट जैसी छवि
जनता खुले तौर पर कह रही है कि शिवकुमार सिंह की पहचान अब एक “पलटीबाज़ नेता” की हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे नेता किसी विचारधारा और वसूल के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ़ निजी फ़ायदे के लिए पार्टियाँ बदलते हैं। यही वजह है कि इस बार जनता का भरोसा उनसे उठता नज़र आ रहा है। देखा जाय तो बरसात के मौसम में भी लगभग सात आठ हजार का जन समूह जनसभा में रहा । सुभाषपा सुप्रीमो के भाषण के दौरान ,सभास्थल की अधिकतर कुर्सियां खाली रहीं ।
पति और राजभर का साथ, पर , ऊषा सिंह की मंच से दूरी
सुभासपा सुप्रीमो ओमप्रकाश राजभर ने सभा में शिवकुमार सिंह का स्वागत किया और भाजपा पर किसी तंज से कतराते दिखे ।उन्होंने सभा में भाषण के दौरान कहा कि, सुभाषपा गरीबों ,शोषित पिछड़ों अति पिछड़ों पार्टी है ।किसी भी समय किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कोई भी जरूरत पड़े तो हमारे कार्यकर्ताओं और अब शिवकुमार सिंह से मिले । हम समस्याओं को दूर करेंगे ।उनकी लड़ाई लड़ी जाएगी ।लेकिन सबसे बड़ी चर्चा रही कि जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह मंच पर नज़र नहीं आईं। किंतु कार्यक्रम के दौरान इंटरकालेज परिसर में ही एक कमरे में मौजूद रहीं। पत्रकारों के पूछने पर उन्होंने बताया कि , मैं भाजपा की हूं , थी ,और रहूंगी ।मेरे हसबैंड सुभाषपा में जा रहे हैं तो वह भी भाजपा की है। अब राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि कहीं शिवकुमार सिंह का यह दांव उनकी पत्नी की राजनीति को मुश्किल में न डाल दे।
जनता की प्रतिक्रिया
हेमनापुर खेल मैदान में भीड़ तो जुटी, सुभाषपा के जनसभा में सपा ,भाजपा ,बसपा के अधिकतर कार्यकर्ता देखे गए । अधिकतर लोग जिज्ञासावश आए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि “हर बार पार्टी बदलने वाले नेता पर कैसे भरोसा किया जाए? जो कल तक भाजपा की ताक़त गिनवा रहे थे, वही आज वही भाजपा को कमजोर समझने लगे।
*सुभाषपा के जनसभा के दौरान मंच से नदारद रहे भाजपा के जिम्मेदार पदाधिकारी
सुभाषपा के मंच से , जिला अथवा क्षेत्रीय भाजपा का जिम्मेदार पदाधिकारी नेताओं की दूरियां आमजनता के बीच चर्चा है। भाजपा जिला अध्यक्ष से यह पूछने पर कि आज की सुभाषपा के मंच पर भाजपा के जिला अथवा क्षेत्रीय कोई जिम्मेदार नेता नहीं दिखे ?…. इस सवाल पर वे कन्नी काटते नजर आए । जिसको लोग आगामी भविष्य के रणनीति से जोड़कर लो देख रहे हैं ।
*भाजपा और सपा को ‘फायदा’*

हालांकि सुभासपा में शामिल होकर शिवकुमार सिंह खुद को “किंगमेकर” दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उनकी छवि से सुभासपा को बहुत ज़्यादा लाभ नहीं मिलेगा। उलटे भाजपा और सपा दोनों उनके अवसरवादी चेहरे को जनता के सामने रखकर अपने-अपने पाले को मज़बूत करने का काम करेंगे। फिलहाल शिवकुमार सिंह अब “सुभाषपा”के हो गए हैं ।देखना है कि आगामी भविष्य की राजनीति किस करवट बैठती है।
जनसभा में उपस्थित जनसमूह के अलावा जिलाध्यक्ष विनीत सिंह ,जिला महासचिव मनोज शर्मा ,प्रमुख महासचिव संतोष राणा ,प्रधान बजरंग सिंह ,प्रधान समरथ पुर राजेश तिवारी ,आदि प्रदेश एवं जिला के कई नेता मौजूद रहे ।