रिपोर्ट- नीरज तिवारी ( प्रधान संपादक )
सुलतानपुर। यूजीसी बिल 2026 को लेकर सवर्ण समाज में उबाल अब सड़क से पहले संगठन में दिखने लगा है। दिनांक 27 जनवरी 2026 को दरियापुर स्थित पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं ब्राह्मण नेता कृष्ण कुमार पाण्डेय ‘कक्कू’ के कैंप कार्यालय पर सवर्ण समाज के विभिन्न वर्गों, जातियों और विचारधाराओं से जुड़े बुद्धिजीवियों की एक अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति और ध्वनि मत के साथ यूजीसी बिल 2026 को “सवर्ण समाज के लिए काला कानून” घोषित करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। इसी के साथ बैठक में उपस्थित समाज के प्रतिनिधियों ने कृष्ण कुमार पाण्डेय ‘कक्कू’ को “यूजीसी काला कानून हटाओ अभियान” का राष्ट्रीय संरक्षक घोषित किया।
“भाई को भाई से लड़ाने की साजिश है यूजीसी बिल 2026” — कक्कू पाण्डेय
बैठक को संबोधित करते हुए कक्कू पाण्डेय ने केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा यह सरकार भाई को भाई से बांटने का तानाबाना बुन रही है। यूजीसी बिल 2026 इसका जीता-जागता सबूत है। अगर यह कानून लागू हुआ तो सिर्फ सवर्ण ही नहीं, बल्कि पिछड़े और अनुसूचित समाज के बीच बने सामाजिक भाईचारे पर भी गहरा और खतरनाक असर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कानून शिक्षा सुधार के नाम पर सामाजिक विभाजन का औजार है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रयागराज की घटना पर भी फूटा गुस्सा
सभा में प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्य पर प्रशासन द्वारा किए गए हठधर्मी बल प्रयोग की कड़ी निंदा की गई। कक्कू पाण्डेय ने कहा कि जब साधु-संत भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम समाज की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह लोकतंत्र नहीं, दमन तंत्र है।
ब्लॉक से प्रदेश तक आंदोलन का ऐलान
बैठक में साफ शब्दों में एलान किया गया कि यूजीसी काला कानून के खिलाफ ब्लॉक, तहसील, जिला और प्रदेश स्तर तक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। यह लड़ाई सिर्फ एक वर्ग की नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और शिक्षा की आत्मा को बचाने की लड़ाई होगी।
ऋषभ मिश्रा बने अध्यक्ष
बैठक में ध्वनि मत से ऋषभ मिश्रा को अभियान का अध्यक्ष चुना गया। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन अब पीछे नहीं हटेगा।
राजनीतिक संकेत साफ
दरियापुर की इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि यूजीसी बिल 2026 को लेकर सवर्ण समाज अब चुप नहीं बैठने वाला। कृष्ण कुमार पाण्डेय ‘कक्कू’ के नेतृत्व में यह मुद्दा आने वाले दिनों में सड़क से सदन तक गूंज सकता है।




