सुल्तानपुर। मनुष्य का जीवन अमूल्य है, और जब यह समाप्त होता है तब भी उसकी देह समाज के लिए उपयोगी बन सकती है। देहदान एक ऐसा महान कार्य है, जिसमें व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान या जरूरतमंदों के उपचार हेतु समर्पित कर देता है। यह कदम न
केवल विज्ञान के विकास में सहायक होता है, बल्कि अनगिनत लोगों के जीवन को बचाने में भी मददगार बनता है।
केवल विज्ञान के विकास में सहायक होता है, बल्कि अनगिनत लोगों के जीवन को बचाने में भी मददगार बनता है। देहदान करने वाले लोग वास्तव में मानवता के सच्चे उपासक होते हैं। वे मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा करने का संकल्प लेते हैं। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टर बनने के प्रशिक्षण के लिए मृत शरीर की आवश्यकता होती है, ताकि भावी चिकित्सक सही तरह से शल्यक्रिया और मानव शरीर की संरचना को समझ सकें। इसके अलावा, विभिन्न बीमारियों पर शोध के लिए भी देहदान की अहम भूमिका होती है। इस कार्य के लिए गहरी संवेदनशीलता, साहस और समाज के प्रति गहरा प्रेम चाहिए। देहदान करने वाले लोग किसी धर्म, जाति या संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर मानवता के धर्म का पालन करते हैं। उनके इस कदम से कई परिवारों को आशा की किरण मिलती है, और आने वाली पीढ़ियां बेहतर चिकित्सा सेवाओं का लाभ ले पाती हैं। उनके इस पहल की प्रशंसा करते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल सुल्तानपुर के जिलाध्यक्ष मनीष साहू ने कहा कि समाज को चाहिए कि ऐसे लोगों का सम्मान करे और उनके उदाहरण से प्रेरणा लेकर अधिक से अधिक लोग देहदान के लिए आगे आएं। यह सच है कि मृत्यु जीवन का अंत है, लेकिन देहदान करने वालों के लिए यह अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत होती है—जहां उनका शरीर ज्ञान और जीवन का स्रोत बन जाता है।
आगे उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है पिंटू जी संगठन के जिला मीडिया प्रभारी के पद पर रहकर व्यवसायी समाज की सेवा भी कर रहे है और जल्द ही संगठन के माध्यम से अंजनी कसौधन पिंटू जी को सम्मानित किया जाएगा जिससे समाज के अन्य लोगो को भी प्रेरणा मिलेगी। उनके इस संकल्प की पूर्व विधायक अनूप संडा, अजय साहू, सरजू प्रसाद साहू(पुजारी गायत्री शक्ति पीठ) सतनाम बग्गा, बैजनाथ कसौधन, रमेश निषाद, उमाशंकर कसौधन नन्हे बाबा आदि ने सराहा है।