यूपी

बल्दीराय तहसील में निजी कर्मचारियों का दबदबा, भ्रष्टाचार को मिल रहा बढ़ावा

सरकारी आदेशों की खुलेआम अवहेलना:

सुलतानपुर

योगी सरकार द्वारा स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी बल्दीराय तहसील सहित ब्लॉक कार्यालयों में निजी कर्मचारियों की तैनाती निरंतर बनी हुई है। सरकारी कार्यालयों में इन प्राइवेट कर्मियों की सक्रियता न सिर्फ शासनादेश की अवहेलना है, बल्कि इससे सरकारी गोपनीयता और पारदर्शिता भी प्रभावित हो रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और शिथिलता से भ्रष्टाचार को खुला समर्थन मिल रहा है।
तहसील मुख्यालय के एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्यालयों में कई निजी कर्मी प्रतिदिन सरकारी कर्मचारियों की तरह कार्य करते नजर आते हैं। यही नहीं, कई लेखपाल भी अपने निजी सहायकों के माध्यम से काम करा रहे हैं, जो न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि कई बार किसानों से अवैध वसूली की भी शिकायतें सामने आई हैं। धारा 24 के अंतर्गत हो रही मनमानी पैमाइश में क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया है कि भूमि की पैमाइश के दौरान निजी कर्मियों द्वारा किसानों से मोटी रकम वसूली जाती है। जिन किसानों के पास देने के लिए पैसे नहीं होते, उनकी पैमाइश जानबूझकर टाल दी जाती है। ऐसे कई मामले तहसील कार्यालय में सामने आए हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं हुआ है।

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बल्दीराय ब्लॉक कार्यालय में भी कुछ सफाईकर्मी और निजी व्यक्ति विभिन्न विभागों में बाबुओं की तरह बैठकर सरकारी कामकाज संभालते दिखाई देते हैं। कई ग्राम पंचायतों में सचिवों द्वारा भी निजी व्यक्तियों से परिवार रजिस्टर की नकल जैसे संवेदनशील कार्य करवाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर जब यह मामला उठा तो ब्लॉक कार्यालय की किरकिरी हुई, लेकिन फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। सूत्रों का दावा है कि इन निजी कर्मचारियों को एक स्थानीय जनप्रतिनिधि का संरक्षण प्राप्त है, जिस कारण अधिकारी चाहकर भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

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बल्दीराय तहसील के उपनिबंधक कार्यालय में तो स्थिति और भी गंभीर है। दो सरकारी कर्मियों के अतिरिक्त बाकी सारा कार्य निजी कर्मचारियों के द्वारा किया जा रहा है। ये निजी कर्मी न केवल बैनामा से जुड़ी गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करते हैं, बल्कि बैनामा लिखने से पहले कमीशन लेकर किसानों को अंदर भेजते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में तो जिस भूमि पर आवास बना हुआ है, उसका बैनामा कृषि योग्य भूमि के रूप में दिखा कर किया गया, जिससे कार्यालय की साख को नुकसान पहुंचा है। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उपनिबंधक कार्यालय में गोपनीयता की कोई परवाह नहीं की जाती और निजी कर्मियों द्वारा खुलेआम अनुचित कार्य कराए जाते हैं।

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निष्क्रियता और संरक्षण से बढ़ रही समस्या
प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता और कुछ कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण यह अवैध व्यवस्था लगातार फल-फूल रही है। सरकार की मंशा साफ है कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोषी अधिकारियों और इन निजी कर्मचारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह भ्रष्टाचार यूं ही बेलगाम चलता रहेगा।

 

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